श्री शनेश्वर तीर्थ क्षेत्र शनि आश्रम छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) महाराष्ट्र में शनि साधिका डॉ विभा श्री दीदी जी की सन्यास दीक्षा के बाद पहली बार उनके साध्वी वेदिकाश्री चेतना गिरी दीदीमां के स्वरूप में उपस्थिति, व उनके ही द्वारा ,16 मई 2026 की शनि अमावस्या को होने वाले जन्म के सभी शनि दोषों के निवारण हेतु शनि संबंधित स्पेशल शनि शांति अनुष्ठान में भाग लेने हेतु बुकिंग जारी है संपर्क 9422704358
भगवान श्री शनिदेवजी का संक्षिप्त परिचय

भगवान श्री शनिदेवजी का संक्षिप्त परिचय

कलयुग के भगवान श्री शनिदेवजी का संक्षिप्त परिचय –

  • शनिदेवजी के विभिन्न नाम – शनेश्वर, सूर्यपुत्र, रविनंदन, छायानंदन, कोणस्थ, पिंगल, ब्रभु
  • रंग – शाम-कृष्ण
  • शनिदेव के पिता – भगवान सूर्य, माता – छाया ( सुवर्णा )
  • गोत्र – कश्यप
  • शनिदेव के गुरु – भगवान शिव
  • शनिदेव के मित्र – महाकाल भैरव, हनुमानजी
  • शनि का जन्म स्थल – सौराष्ट्र
  • शनि की प्रिय राशी – मकर, कुंभ
  • शनि का प्रिय दिन – शनिवार
  • शनि के प्रिय नक्षत्र – पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद
  • शनि का एक राशी पर प्रभाव – सात वर्ष
  • शनि की महादशा – 19 वर्ष
  • शनि के प्रख्यात तीर्थ – शनि शिंगणापूर, राक्षसभुवन, नस्तनपूर उज्जैन, तिरुनल्लार, शनि तीर्थ बिरझापुर
  • शनि की प्रिय वस्तू – काली वस्तुयें, लोहा, तेल, कोयला, उड़द, तिल
  • शनि का क्षेत्र – प्रजातंत्र, न्यायालय, प्रशासन, उद्योग, खनिज, विज्ञानिक, अनुसंधान, पत्रकारिता –
  • शनि की उत्पत्ती –
    धर्म ग्रंथो के अनुसार सूर्य की द्वितीय पत्नी सुवर्णा ( छाया ) के गर्भ से शनिदेवजी का जन्म हुआ I शनि के श्यामवर्ण को देखकर सूर्य ने अपनी पत्नी सुवर्णा पर आरोप लगाया कि शनि मेरा पुत्र नही है I तभी से शनि अपने पिता से शत्रुभाव रखते है I शनिदेव ने अपनी साधना, तपस्या द्वारा शिवजी को प्रसन्न किया I
    शिवजी ने शनि को वरदान मांगने के लिये कहा तब शनिदेव ने प्रार्थना की कि युगो-युगो से मेरी माता की पराजय होती रही है I मेरे पिता सूर्य द्वारा बहुत ज्यादा अपमानित व प्रताडित किया गया है I अतः माता की ईच्छा है की मेरा पुत्र शनि अपने पिता से मेरे अपमान का बदला ले और उससे भी ज्यादा अधिक शक्तिशाली बने I
    तब भगवान शंकर ने वरदान देते हुए कहा कि नवग्रहों में तुम्हारा सर्वश्रेष्ठ स्थान रहेगा I मानव तो क्या देवता भी तुम्हारे नाम से भयभीत रहेंगे I भगवान महाकाल शिव ने शनि को अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर अपनी संहारक शक्ती के उपयोग का अधिकार दिया I
  • शनि धरती का न्यायाधीश –
    शनि के स्वभाव के दो पक्ष है I एक तरफ वह तपस्वी, त्यागी, आत्म-स्वाभिमानी, कठोर अनुशासन प्रिय, न्याय प्रिय है और दुसरी ओर हमारे शुभ अशुभ कर्मो के फलदाता हैं I यदि किसी ने कर्म खोटे किये हैं तो उसे खोटा फल मिलेगा I इसमें उस न्यायाधीश शनि का क्या दोष ? शनि का संबंध जीवन कि नैतिकता -अनुशासन से है I इसकी अवहेलना करने पर वह कुपित हो जाते है I शनि का सुख प्रभाव जहाँ व्यक्ती के लिये सुखद व कल्याणकारी होता है वही शनि की प्रतिकूल स्थिती बहुत पीडादायक होती है I
    यह कितनी बडी भ्रांती है, शनि ग्रहो मे न्यायाधीश है, काले वस्त्र है इनके क्यो ? काले रंग पर कोई रंग नही चढता, न्याय सदैव कडवा होता है, कठोर होता है I
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