श्री शनि तीर्थ क्षेत्र बिरझापुर
तहसील – धमधा, जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़
संस्थापिका – एस्ट्रोलॉजर, शनि साधिका डॉ विभाश्री दीदी जी
इतिहास व महत्वपूर्ण जानकारी
सन 1996 में ज्योतिषाचार्या डॉ विभाश्री दीदी का निवास छत्तीसगढ़ राज्य के जिला दुर्ग में था। उस समय जिला दुर्ग मध्य प्रदेश राज्य के अन्तर्गत आता था छत्तीसगढ़ राज्य का बटवारा नहीं हुआ था। जिला दुर्ग के रेलवे स्टेशन से 2 कि मी की दूरी पर आदित्यनगर नामक कॉलोनी में दीदी जी का भवन शनि संस्थान था यहां से ही शनिदेव जी के सारे सेवा कार्य हुआ करते थे। एक बार शनि साधिका डॉ विभाश्री दीदी जी अपने आध्यात्मिक सेवा ग्रुप के साथ शनिक्षेत्र शिंगणापुर, जिला अहमदनगर, महाराष्ट्र में आई जनवरी 1996 में दीदी जी को शिंगणापुर में जब वहां के अंधविश्वासी लोगों ने ये यह कहकर शनिदेव जी की पूजा नहीं करने दी कि महिलायें शनिदेव की पूजा नहीं कर सकती हैं, ये बात दीदी जी को बहुत बुरी लगी इसके बाद दीदीजी के हठयोग और साधना के प्रभाव से शनिदेव जी ने 1997 में यह संकेत दे दिया कि उनको शनिदेव कि प्रतिमा कब, कहाँ, कैसे मिलेगी और उसकी स्थापना किस क्षेत्र में होगी और महिलाओं को धर्म क्षेत्र में, शनिदेव की पूजा में भाग लेने का अधिकार दिलाने के लिये उनको कितना संघर्ष, किस रूप में करना होगा।
बस दीदी जी के जप, तप, व्रत, साधना,योग के फलस्वरूप ठीक वैसी ही शनिदेव जी की मूर्ति प्रतिमा वन के आकार की 5 फिट 8 इंच वाली 5.4.1997 में एक छोटे से ग्राम बिरझापुर में बहुत बड़े धार्मिक सम्मलेन व उत्सव के साथ स्थापित हो गयी यह चमत्कार से कम नहीं था।
श्री शनितीर्थ क्षेत्र बिरझापुर धमधा, दुर्ग छत्तीसगढ़ का इतिहास
सन1996 सेशनिसाधिकाडॉविभाश्रीजीकोएकस्वप्नप्रतिदिनप्रातः4 आताथाजिसमेंवेएकअजनबीगांवमेंजातीथीवहांएकतालाबकिनारेखण्डरमंदिरकेसामनेखुदाईकराईजातीथीऔरजैसेहीखुदाईमेंकुछप्राप्तहोनेवालाहोताथाआँखखुलजातीथी। उड़ीसाकेझारसुगड़ाजिलेकेबरगड़गांवमेंयहस्थानमिलाफिरअप्रेलमेंयहाँसेखुदाईद्वारा5 फिट8 इंचकेअंग्रेजीकेवनआकारकीएकप्रतिमाप्राप्तहुईजोकिबिलकुलशिंगणापुरश्रीक्षेत्रकेजैसीहीदिखतीहै।वहांसेदोछोटीमूर्तियांडेढ़फिटवालीराहू- केतूदेवताकीभीसाथमेंप्राप्तहुईजिनकीस्थापनादुर्गजिलेकीधमधातहसीलमेंएकगांवबिरझापुरमें5.4.1997 कोबहुतबड़ेसंतसम्मेलनकेद्वाराविद्वानपुरोहितोंनेकी। बिरझापुरग्रामकेहीएककिसानपरिवारकेविद्वानब्राम्हणपंश्रीकांतशर्माकीओरसेशनिदेवजीकीसेवामेंआधाएकड़कीयहभूमिदानमेंदीदीजीकोप्राप्तहुईथी।वर्तमानमेंइसशनितीर्थकीसंचालिकाडॉविभाश्रीजी, संरक्षक- श्रीश्रीकांतशर्माऔरस्थायीपुरोहितपंछगनशर्माजीहै। जोसारीशनितीर्थक्षेत्रकीव्यवस्थाकोसंभालतेहैं। दीदीजीद्वारा छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद)महाराष्ट्रमेंशनिआश्रमस्थापितहोनेकेपूर्वसारेअनुष्ठान/ शांतिमहायज्ञइसीभूमीमेंशनितीर्थबिरझापुरमेंहीहुआकरतेथे। अभीभीप्रतिनवरात्रिमेंयहांशनिशांतिहेतुअसंख्यज्योति(कलश) तेलकीस्थापनाहोतीहैंऔरप्रत्येकशनित्योहारोंपरसैकड़ोंश्रद्धालुपैदलचलकरभीदर्शनार्थपहुँचतेहैं।यहांपहुँचनेकेलियेदुर्गबसस्टॅंडसेगण्डईएवंजबलपुरकेलियेजानेवालीबसेंप्राप्तहोतीहै।गण्डईमार्गपरयहबिरझापुरगांवकाफीप्रसिद्धिप्राप्तकरचुकाहै।दुर्गसेधमधाकेलियेजानेवालीबसेंप्रतिघंटेयात्रियोंकोप्राप्तहोतीहैफिरधमधाबसस्टॅंडसे3 किमीदूरयहांशनिक्षेत्रमेंआटोवटॅक्सीद्वाराभीजायाजासकताहै।यहांकीप्रतिमास्वयंभूऔरबिलकुलशिंगणापुरजैसीहोनेकेनामसेऔरयहांदीदीजीद्वारापहलीबारमहिलाओंकोशनिपूजाकास्वतंत्रअधिकारदेनेकेनामसेपिछलेदिनोंयहक्षेत्रबहुतचर्चाकाविषयबनाथा।
उल्लेखनीयहैकिशनिसाधिकाडॉविभाश्रीदीदीजीनेअपनेसाधनात्मकमार्गमेंचलरहेअपारसंघर्षों, पारिवारिकविवादोंकेकारणजब24.11.19 मेंजिलादुर्गकेअपनेनिजीशनिसंस्थानका, परिवारकात्यागकरकेअपनेशिष्यों, भक्तों, साथियोंवज्योतिषाचार्योकेसाथगंगोत्रीमेंगंगाजीमेंखड़ेहोकरजबगृहस्थसंन्यासकी, आजीवनब्रम्हचर्यकीदीक्षालीतबउसकेबादउन्होंने14.10.2000 कोशनिदेवकीकृपासेमहाराष्ट्रकेछत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद)जिलेकेN-2 सिडकोकेक्षेत्रमेंएकविशालशनिमंदिरकीस्थापनाकीजहांपरहीवर्तमानमेंदीदीजीकास्थाईनिवासभीहैऔरफिरबढ़तीभीड़कोदेखकरआपने2005 में4 एकड़कीभूमीमेंविशाल,खूबसूरतशनैश्वरतीर्थक्षेत्रशनिआश्रमचिकलथाना, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद)कीस्थापनाकरकेयहप्रमाणितकरदियाकिशनिदेवकीउनपरकितनीकृपाहै- बनातानहींकोईशनिजैसा- बननेवालाव्यक्तिचाहिये।
दिसम्बर 2013 में शनितीर्थ क्षेत्र बिरझापुर, धमधा, दुर्ग छत्तीसगढ़ के संरक्षक श्री श्रीकांत शर्मा और पण्डित श्री छगन शर्मा जी के सहयोग से यहां 7 दिन चलने वाली शनि भागवत कथा भी की थी इस कार्यक्रम में रायपुर जिले के, दुर्ग जिले के सांसद, विधायकों, प्रोड्यूसर आदि के अलावा मुंबई के अभिनेता दयाशंकर पाण्डेय शनिदेव का अभिनय करने वाले ने भी भाग लिया था। संस्कार चैनल के द्वारा इस कार्यक्रम को देखकर ज्ञान अर्जन का लाभ भी मिला। शनि साधिका दीदी जी की शनि भागवत कथा में उस समय उमड़ने वाले जनसमुदाय ने यह प्रमाणित कर दिया था कि यह तीर्थ क्षेत्र शनि के आठों धामों के जैसा ही प्रसिद्ध होगा जिसके लिये शनिदेव जी ने ही डॉ विभाश्री दीदीजी को चुना है।
अधिक जानकारी हेतु संपर्क
श्री शनि आश्रम, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र
संरक्षक – श्रीकांत शर्मा
पुजारी – छगन शर्मा
9422704358, 9424139677
गौरव शर्मा
9977344032
रवी शर्मा
9424112774